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Dindori डिंडोरी : आदिवासी बहुल डिंडोरी जिले के जिला अस्पताल से सामने आए एक वायरल वीडियो ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे 9 सेकंड के वीडियो में दावा किया गया कि मरीज को नॉर्मल सलाइन (NS) की जगह 2 लीटर की मिनरल वॉटर बोतल से ड्रिप चढ़ाई जा रही है। वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और मामले की जांच शुरू कर दी गई। जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में 18 वर्षीय सोनू यादव को चूहे मारने की जहरीली दवा खाने के बाद भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान किसी व्यक्ति ने अस्पताल के अंदर का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। वीडियो में एक मिनरल वॉटर की बोतल स्टैंड पर टंगी दिखाई दे रही थी और उससे जुड़ी एक नली मरीज की ओर जाती नजर आ रही थी।
देखिए चिकित्सा मंत्री जी....डिंडोरी जिले के सरकारी अस्पताल में 2 लीटर वाली पानी की बोतल से मरीज को ड्रिप चढ़ाई जा रही है....!@rshuklabjp pic.twitter.com/8i9l5GtV6X
— Rupesh Mishra (@rupeshmishramp) July 23, 2026
वीडियो बनाने वाले डिंडोरी निवासी प्रदीप राजपूत के अनुसार, वह किसी काम से दोपहर करीब 3:15 बजे जिला अस्पताल पहुंचे थे। बारिश शुरू होने के कारण वह इमरजेंसी वार्ड में चले गए। वहां उन्होंने बोतल को स्टैंड पर टंगा देखा, जिसे देखकर उन्हें यह असामान्य लगा और उन्होंने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। इसके बाद वीडियो तेजी से वायरल हो गया। मामले पर सफाई देते हुए डिंडोरी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज पांडे ने वायरल दावे को गलत और भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि मरीज को मिनरल वॉटर की ड्रिप नहीं चढ़ाई जा रही थी। मरीज ने जहरीली दवा खा ली थी, जिसके बाद उसकी हालत को देखते हुए गैस्ट्रिक लैवाज यानी पेट की सफाई की प्रक्रिया की गई।
CMHO ने बताया कि पहले मरीज के पेट की सफाई नॉर्मल सलाइन से की गई थी और इसके बाद पानी का इस्तेमाल किया गया। वायरल वीडियो में दिखाई दे रही बोतल का उपयोग ड्रिप के लिए नहीं बल्कि गैस्ट्रिक लैवाज प्रक्रिया के दौरान किया गया था। हालांकि, डॉ. मनोज पांडे ने यह भी माना कि मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार गैस्ट्रिक लैवाज के लिए मिनरल वॉटर का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आमतौर पर इस प्रक्रिया में हल्के गुनगुने पानी का उपयोग किया जाता है। इसी कारण पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इलाज के दौरान तय चिकित्सा मानकों का पालन हुआ या नहीं।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मरीज सोनू यादव की हालत अब सामान्य है और उसे किसी तरह का खतरा नहीं है। CMHO ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली किसी भी जानकारी पर बिना पुष्टि के विश्वास न करें। वहीं, वीडियो सामने आने के बाद जिला अस्पताल की उपचार व्यवस्था और चिकित्सा प्रक्रिया को लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा शुरू हो गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि अस्पताल में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या वायरल वीडियो को गलत तरीके से पेश किया गया।
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